Tuesday, October 17, 2017

Mere Dukh ki koi dawa na karo by Sudarshan Fakir

मेरे दुःख की कोई दवा न करो 
मुझे खुद से अभी जुदा न करो 


नाखुदा को खुदा कहा है तो फिर 
डूब जाओ खुदा खुदा न करो 


ये सिखाया है दोस्ती ने हमें 
दोस्त बन कर कभी वफ़ा न करो 


आशिकी हो के बंदगी "फ़ाकिर"
बे दिली से तो इब्तदा न करो...



Niti ke Dohe / नीति के दोहे

साई इतना दीजिये, जा में कुटुंब समाये,
मैं भी भूखा न रहूँ, साधू न भूखा जाए


God, grant me enough for my family. Let my family have enough to eat, and may we have enough to feed a guest who comes to the door.

Monday, October 16, 2017

On Childhood Depression

डॉक्टर: क्या तकलीफ है?


अभिभावक: ये हंसती बोलती नहीं है. हमेशा गम सुम सी रहती है


डॉक्टर: तो पहले हंसती बोलती थी?


अभिभावक: जी हाँ, पहले तो इतनी बातें करती थी कि क्या बताऊँ!


डॉक्टर: तो तब आप क्या करते थे?


अभिभावक: मैं इस से कहता था की बेटा चुप हो जाओ! मेरा दिमाग मत खाओ! चुप रहा करो!


डॉक्टर: और अब ये चुप रहती है?


अभिभावक: ओफ्फोह! मैंने अभी तो बताया आपको!


डॉक्टर: अच्छा. तो इलाज की ज़रुरत किसे है?


अभिभावक: इसे है, और किसे है?


डॉक्टर: ठीक है. मैं दवाई लिखे देता हूँ. 

Saturday, October 14, 2017

Random thoughts on love and life..


I keep staring at my WhatsApp all day, as if, magically, some meaning will pop out of a message there and enter my life.


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Love is not a linear scale. We don't love people more or less than each other. Love is a radial diagram. We love everyone in a different way.
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Thursday, October 12, 2017

Why do you write in Hindi

क्यों लिखते हो हिंदी में?
ये बिकती कहाँ है?


इसीलिए लिखते हैं साहब 
ये बिकती नहीं है. 

Wednesday, October 11, 2017

आओ माँ, मेरे संग खेलो !

आओ माँ, मेरे संग खेलो !


रुक जा मुन्नी, सांस तो ले लूँ !


देखो  माँ, गुड़िया मेरी है
कितनी देर इस ने झेली है!
रूठ गया ये मेरा बादल
कहता अब मैं खेलूंगा कल!


मोटर कार भी हुई पुरानी
पर तुमने ये रेस न जानी
हवाई जहाज़ में जंग लग गया
राह तकते हर कोई थक गया!


सब काम तुम्हारे हो जाते हैं,
बस यही एक काम न होता
मेरे संग खेलो न, अम्मा,
कहते कहते मैं बन गयी तोता!


अच्छा गुड़िया रानी आओ,
मेरे सारे काम भुलाओ
तुमसे बढ़ कर क्या है परी जी,
ले आओ अब अपनी छड़ी जी


हम तुम देर शाम तक खेलें
बाबा की भी राह न देखें!
न दाल बनेगी न तरकारी,
खुश हो गई न, मेरी प्यारी!



Sunday, October 08, 2017

Katranein / कतरनें


तुमने बहुत बरस मेरा इंतज़ार किया न?


हाँ.


पूरे १८ बरस. 


अभी आगे के ३० बरस तो साथ के हैं. सौदा फायदे का रहा!


और जो मैं ३० बरस न रहूँ? जो मैं दग़ाबाज़ी कर के जल्दी ही चल दूँ, तो?


जो तुम कल ही चल दो, मेरे साथ कल तक भी न रहो, तो भी ये सौदा फायदे का ही रहा. 



Saturday, October 07, 2017

ਫਸਲ / फसल / Harvest


बीज तो अपने दिल में रोपा जाता है
दर्द खाद है
कविता उगती जाती है। 


The seed is sown
in the heart
Pain provides the nourishment
and Poetry is born.


ਰੋਪੀ ਮੇਰੇ ਜੀ ਨੇ
ਪੀੜ ਨੇ ਪਾਈ ਖਾਦ
ਕਵਿਤਾ ਉਗਦੀ ਵੇੜੇ
ਨਾ ਅਥਰੂ ਨਾ ਪਾਸ਼। 

Friday, October 06, 2017

Sher on reaping the benefits of hard work

धूप कब तक मुझे जलायेगी,
कल मेरे पेड़ भी बड़े होंगे 


Dhoop Kab tak mujhe jalayegi
Kal mere peD bhi bade honge..
- I think its by Bashir Badr, but not sure..